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विद्यालयों की मनमानी पर सी.बी.एस.ई. का शिकंजा, शुल्क नियंत्रण के साथ ‘डोनेशन’ पर भी रोक

अबसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.ई.) से संबद्ध विद्यालयों के शुल्क पर भी राज्य सरकार अधिनियम और नियामक, दोनों ही लागू होगें, तेलंगाना टूडे  ने रिपोर्ट किया।

बोर्ड जो संबद्ध के उपनियमों का पुनरोत्थान कर रहा है ने यह साफ किया कि शुल्क के संबंध में बने हुए केंद्र और राज्य सरकारों के अधिनियम व नियामक अब सी.बी.एस.ई. संबद्ध विद्यालयों पर भी लागू होंगे।

पहले सी.बी.एस.ई. विद्यालयों के लिए यह अनुरक्षित था कि उनके शुल्क पर राज्य सरकार का कोई नियामक लागू नहीं होता। नए उप-नियमों से सी.बी.एस.ई. संबद्ध विद्यालयों के शुल्क पर पूर्णतः सरकार का नियंत्रण रहेगा। हालाँकि विद्यालय विधि, नियामकों और सरकारी निर्देशों के अधीन रहकर शुल्क संशोधन कर सकते हैं।

बोर्ड के संशोधित उप-नियम कहते हैं कि किसी संस्था या ट्रस्ट द्वारा चलाए जाने वाले विद्यालय प्रतिव्यक्ति शुल्क नहीं लगा सकते हैं, और न ही प्रवेश के लिए दान स्वीकार कर सकते हैं। शुल्क के लिए नियम है कि वह राज्य शिक्षा विभाग के नियामकों के अनुसार हो।

बोर्ड ने निर्णय लिया है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो पाँच लाख रुपए के अर्थदंड के साथ विद्यालय का स्तर उच्च माध्यमिक से माध्यमिक कर दिया जाएगा।

इसके अलावा उप-नियमों के उल्लंघन से संबद्ध के निलंबन और मान्यता के वापस लेने तक कार्रवाई की जा सकती है। उस विद्यालय की ओर से दो वर्षों तक विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा नहीं दे सकेंगे।