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आंध्र प्रदेश- कोनासीमा के नामकरण पर अमलापुरम में हिंसा, 200 से अधिक हिरासत में

आंध्र प्रदेश के अमलापुरम में मुख्यमंत्री वाईएसआर जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व में राज्य सरकार के नव-निर्मित कोनासीमा जिले का नाम डॉ बीआर आंबेडकर रखने के निर्णय के विरुद्ध हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया।

प्रदर्शनकारियों की मंगलवार (24 मई) को कोनासीमा जिले के मुख्यालय अमलापुरम में पुलिस के साथ झड़प हुई। साथ ही पुलिस वाहनों, बसों, परिवहन मंत्री पी विश्वरूप और सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के मुम्मिडीवरम विधायक पी सतीश के घरों को आग के हवाले कर दिया।

हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बुधवार (25 मई) को कर्फ्यू लगा दिया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कोनासीमा एसपी के सुब्बा रेड्डी ने बताया, “हिंसा के सिलसिले में 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया है।”

पूर्वी गोदावरी जिले से बना कोनासीमा उन 13 नए जिलों में सम्मिलित है, जिनकी घोषणा पिछले माह की शुरुआत में वाईएसआरसीपी सरकार ने की थी।

आंध्र प्रदेश सरकार ने गत सप्ताह एक अधिसूचना जारी कर जिले का नाम बीआर आंबेडकर के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया था। इस दौरान जनता को एक माह का समय देते हुए नागरिकों से आपत्तियाँ आमंत्रित की थीं।

हालाँकि, नाम बदलने के प्रस्ताव का अन्य समुदायों के वर्गों विशेष रूप से कापू और कुछ पिछड़ा वर्ग (बीसी) समूहों द्वारा विरोध किया गया है। वे मांग कर रहे हैं कि पर्यटन क्षेत्र के पारंपरिक नाम कोनासीमा को बरकरार रखा जाना चाहिए।

आईई रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति क्रमशः जिले की जनसंख्या की लगभग 19 प्रतिशत और 5 प्रतिशत है। शेष जनसंख्या मुख्य रूप से कापू और बीसी से बनी है, जिसमें कापू पूर्ववर्ती पूर्वी गोदावरी जिले में सबसे प्रमुख जाति है।

आईई रिपोर्ट में एक छात्र के हवाले से कहा गया, “विपक्ष डॉ. आंबेडकर नहीं बल्कि क्षेत्र की पहचान मिटाने के विरुद्ध है।”