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अमरावती हत्याकांड- उमेश की सफलता से जलता था यूसुफ, वॉट्सैप पर फैलाया था पोस्ट

मोहम्मद युसूफ खान 16 साल से उमेश कोल्हे का दोस्त था। हालाँकि, वह एक केमिस्ट के रूप में कोल्हे की सफलता से जलता था।

कोल्हे ने हाल ही में एक और दुकान खोली थी।

दो सप्ताह पहले यूसुफ खान ने उस पर पलटवार करने के लिए कोल्हे का एक सोशल मीडिया पोस्ट अपने मुस्लिम दोस्तों के वॉट्सैप ग्रुप में प्रसारित किया था। स्वराज्य द्वारा नहीं देखी गई पोस्ट कथित तौर पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता के समर्थन में थी, जो उन्हें दी जा रहीं धमकियों के विरुद्ध थीं।

पोस्ट के वायरल होते ही 56 वर्षीय कोल्हे की हत्या कर दी गई। शुरू में पुलिस ने इसे डकैती का मामला समझा था। अब जाँच ईशनिंदा हत्या की तरफ संकेत कर रही है।

इस मामले को लेकर कई समाचारों में यह बात सामने आई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के आज के (4 जुलाई) संस्करण में बताया गया कि जाँचकर्ताओं के अनुसार, खान ने उन्हें बताया कि उसने एक केमिस्ट के रूप में कोल्हे की सफलता का विरोध किया और इस बात से नाराज़ था कि जब कोल्हे उनके समुदाय के ग्राहकों के कारण समृद्ध हुए फिर भी उन्होंने पैगंबर को बदनाम करके और उनका अपमान करने वालों का समर्थन करके उनकी पीठ में छुरा घोंप दिया था।

रिपोर्ट में कहा गया कि कोल्हे के परिवार को उनकी धमकियों के बारे में पता नहीं था। मामले में अब तक सात गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कोल्हे के भाई महेश के हवाले से कहा गया कि खान उमेश का दोस्त था और उसके अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक, उमेश और खान ब्लैक फ्रीडम नाम के एक वॉट्सैप ग्रुप के सदस्य थे। उमेश ने इस ग्रुप पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसे खान ने रहबरिया ग्रुप नाम के दूसरे वॉट्सैप ग्रुप पर भेजा  था।

कोल्हे का कथित हत्यारा इरफान इसी गुट का हिस्सा था। उसे 2 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इरफ़ान और खान के अलावा मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में मुदसिर अहमद, शाहरुख पठान, अब्दुल तौफीक, शोएब खान और अतीब राशिद शामिल हैं, जिनकी उम्र 20 साल है।

विशेष रूप से राजस्थान के उदयपुर शहर में इसी तरह के अपराध को लेकर कन्हैया लाल तेली की हत्या से एक सप्ताह पहले कोल्हे की हत्या कर दी गई थी।

अमरावती मामले में जाँचकर्ताओं के अनुसार, समूह में तीन और लोगों द्वारा पोस्ट साझा किए गए थे और उनमें से कम से कम दो को माफी वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर किया गया था। पुलिस ने इनमें से एक व्यक्ति को शिकायत दर्ज करवाने के लिए मना लिया है, ताकि वे जाँच शुरू कर सकें।

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी भी मामले की जाँच कर रही है।