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मोहम्मद ज़ुबैर को सीतापुर मामले में मिली जमानत पर नहीं आ सकेंगे जेल से बाहर

सीतापुर में धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार (8 जुलाई) को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को अंतरिम जमानत दे दी।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायाधीश जेके माहेश्वरी की अवकाश पीठ ने ज़ुबैर को 5 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दे दी और मामले की आगे की सुनवाई के लिए उसे नियमित पीठ के समक्ष रखा।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने मोहम्मद ज़ुबैर के विरुद्ध एक ट्वीट के लिए प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर तीन हिंदू संतों- यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को घृणा फैलाने वाला कहा था।

सर्वोच्च न्यायालय ने ज़ुबैर को आदेश दिया है कि वह सीतापुर मजिस्ट्रेट की अदालत के अधिकार क्षेत्र को न छोड़ें और मामले से जुड़े मुद्दे पर कोई नया ट्वीट पोस्ट ना करें।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि अंतरिम जमानत देने से मोहम्मद ज़ुबैर को रिहा करने का अधिकार नहीं होगा क्योंकि वह एक अन्य मामले में दिल्ली की एक न्यायालय की न्यायिक हिरासत में है।

इस पर न्यायालय ने कहा कि उनका आदेश केवल सीतापुर मामले पर लागू होता है ना कि ज़ुबैर के खिलाफ किसी अन्य लंबित मामले पर।

सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, “न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) 7 जुलाई, 2022, सीतापुर के आदेश का अंग्रेजी में अनुवाद किया जाए और जमानत की प्रार्थना को खारिज करने के आदेश के साथ न्यायालय में दायर किया जाए। इस बीच, इस बीच याचिकाकर्ता को जेएमएफसी द्वारा लगाई जाने वाली शर्तों पर 5 दिनों की अवधि के लिए जमानत का अंतरिम आदेश दिया जाएगा।”

लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार, आदेश में कहा गया, “याचिकाकर्ता बेंगलुरु (उसके निवास) या कहीं और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेगा।”