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पाक के बाद चीन ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में सम्मिलित होने से मना किया

अफगानिस्तान पर सुरक्षा वार्ता के लिए बुधवार को सात प्रमुख क्षेत्रीय देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख नई दिल्ली में एकत्रित होंगे। वहीं, इसमें चीन और पाकिस्तान अपनी उपस्थिति नहीं दर्ज करवाएँगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार इस तरह का आयोजना किया जा रहा है। पाकिस्तान ने भारत की वजह से आने से मना किया। हालाँकि, चीन ने प्रतिक्रिया दी। उसने समय संबंधी कुछ जटिलताओं की वजह से सम्मेलन में भाग लेने में असमर्थता जताते हुए कहा कि यदि इसमें सम्मिलित होते तो हमें प्रसन्नता होती। सूत्रों का कहना है कि चीन की प्रतिक्रिया पाकिस्तान की संवेदनशीलता के कारण हो सकती है।

बैठक में अफगानिस्तान के भीतर और सीमाओं के पार आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सीमा पार आवाजाही चिंता का एक अन्य क्षेत्र है। इसके सामने नई चुनौती अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों द्वारा छोड़े गए सैन्य उपकरणों और हथियारों से उत्पन्न होने वाला खतरा है। आशंका है कि इनका उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने या क्षेत्र में संगठित अपराध नेटवर्क को प्रसारित करने के लिए किया जा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि यह संवाद नया नहीं था। पहला संवाद 2018 में ईरान में पाँच देशों भारत, रूस, अफगानिस्तान, चीन और ईरान के साथ  हुआ था। पाकिस्तान को तब आमंत्रित किया गया था लेकिन उसने मना कर दिया था। 2019 में ईरान ने दूसरा आयोजन किया। अफगानिस्तान को कोई निमंत्रण नहीं भेजा गया। तालिबान या पिछली सरकार को भी नहीं।

भारतीय योजनाकारों का मानना ​​है कि बैठक की सबसे बड़ी भेंट अफगानिस्तान में अनिश्चितता के सामने आने वाले खतरों की एक आम समझ होगी। इस वार्ता से एक नए सुरक्षा ढाँचे की ओर बढ़ना असंभव है लेकिन भारतीय पक्ष को अपेक्षा है कि यह एक में विकसित हो सकता है।