समाचार
रूस पश्चिम निर्माताओं के स्थान पर भारतीय दवा कंपनियों की संभावनाओं को बढ़ा रहा

नई दिल्ली में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि भारतीय दवा कंपनियाँ मास्को छोड़ने वाले पश्चिमी निर्माताओं का स्थान ले सकती हैं।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अलीपोव ने भारत को दुनिया की औषधशाला के रूप में सम्मानित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि देश आम दवाओं का एक प्रमुख उत्पादक है, जो मूल से कमतर नहीं है।

रिपोर्ट में रूसी राजदूत के हवाले से कहा गया, “रूसी बाज़ार से कई पश्चिमी कंपनियों की वापसी से जो स्थान रिक्त हुए हैं, वास्तव में कई उद्योगों, विशेषकर फार्मास्यूटिकल में भारतीय कंपनियाँ उन जगहों पर अपना कब्जा कर सकती हैं।”

अब तक भारत संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में प्रस्तावों पर मतदान से दूर रहा है, जिसमें यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा की गई थी।

इसके अतिरिक्त, भारतीय रिफाइनरों ने कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के मध्य रियायती तेल खरीदने के मास्को के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया है।

हाल ही में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) जैसे शीर्ष भारतीय रिफाइनर ने मई के लिए क्रमशः दो और तीन मिलियन बैरल रूसी तेल का ऑर्डर दिया।

अलीपोव ने भारत की अनूठी कूटनीतिक नीति को भी छूते हुए टिप्पणी की, “प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय नेतृत्व अंतर-राष्ट्रीय मामलों में देश की लगातार स्वतंत्र नीति को पूरा करते हैं।”

उन्होंने कहा, “बार-बार कहा है कि हमने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का स्वागत किया है और अंतर-राष्ट्रीय क्षेत्र में इसकी भूमिका और इसके प्रभाव को मजबूत किया है।”