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उत्तर बिहार को दरभंगा के बाद रक्सौल में अपना दूसरा हवाई अड्डा मिलने की संभावना

बिहार में पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन रक्सौल हवाई अड्डे को क्रियाशील बनाने के प्रयासों में तेज़ी लाया है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन कथित तौर पर इसके रणनीतिक स्थान के साथ भूमि और इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता को देखते हुए हवाई अड्डे को पुनर्जीवित करने के लिए राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजने के लिए तैयार है।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद भारत-नेपाल सीमा पर 213 एकड़ में रक्सौल हवाई अड्डे की स्थापना की थी। इसने भारतीय वायु सेना (आईएएफ) और भारतीय सेना के लिए एक आपातकालीन लैंडिंग रनवे के रूप में काम किया और इसे सरकार की क्षेत्रीय संयोजकता योजना (आरसीएस) में सूचीबद्ध किया गया है।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा सांसद सुशील मोदी को एक पत्र लिखा, “रक्सौल हवाई अड्डे के विकास के लिए इसे चालू करने की आवश्यकता है। इसको आरसीएस-उड़ान के तहत बोली लगाने वाले गैर-सेवारत हवाईअड्डे की सूची में सम्मिलित किया गया है। हालाँकि, रक्सौल से उड़ान संचालित करने के लिए किसी भी एयरलाइन से अब तक कोई बोली नहीं मिली है।”

पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ संजय जायसवाल के अनुसार, सिंधिया ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी पत्र लिखा था और रक्सौल हवाई अड्डे के विकास के लिए अतिरिक्त 141 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने की मांग की थी।

यह हवाई अड्डा 2015 में 250 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से बिहार के प्रधानमंत्री पैकेज में भी सम्मिलित है। नेपाल में सिमारा और निजागढ़ हवाई अड्डे रक्सौल से क्रमशः केवल 12 किमी और 18 किमी दूर स्थित हैं।