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अडानी इंटरप्राइजेज ने कोल इंडिया की पहली आयात निविदा में सबसे कम बोली लगाई

24.16 लाख टन की आपूर्ति के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली के साथ अडानी इंटरप्राइजेज कोयले के आयात के लिए कोल इंडिया की निविदा में सबसे कम बोली लगाने वाले के रूप में उभरा है।

एक अधिकारी ने जानकारी दी कि उद्धृत मूल्य के लिए वार्ता हो सकती है क्योंकि न्यूनतम बोली मूल्य और खनिक के 3,100 करोड़ रुपये के अपने अनुमान के मध्य का अंतर लगभग 30 प्रतिशत से अधिक है।

पीटीआई को अधिकारी ने बताया, “अडानी की बोली सबसे कम है लेकिन यह कोल इंडिया के अपने अनुमान से 900 करोड़ रुपये अधिक है। सबसे कम बोली लगाने वाले द्वारा उद्धृत मूल्य के बारे में खनिक के अधिकारी आपस में चर्चा कर रहे हैं। इस बात की अधिक संभावना है कि मूल्य पर और बातचीत की जाएगी।”

अडानी समूह और अन्य 10 कंपनियों ने फ्रेट-ऑन-रोड (फॉर) आधार पर सूखे ईंधन की आपूर्ति के लिए खननकर्ता के पहले कोयला आयात निविदा के लिए रुचि दिखाई थी।

अधिकारी ने कहा कि यह निविदा राज्य बिजली उत्पादन कंपनियों से प्राप्त मांग के आधार पर अल्पकालिक आपूर्ति के लिए मंगवाई गई थी।

इस बीच, 60 लाख टन आयातित कोयले की आपूर्ति के लिए अन्य दो निविदाओं हेतु बोलियाँ जमा करने की अंतिम तिथि मंगलवार को है।

अधिकारी ने कहा कि निविदाओं को अंतिम रूप देने के लिए बोर्ड की बैठक तय नहीं की गई है और दूसरी निविदा खुलने के बाद ऐसा होने की अपेक्षा है।

मोहित मिनरल्स और चेट्टीनाड लॉजिस्टिक्स और विदेशों से कोयला निर्यात करने वाली कुछ एजेंसियों ने सीआईएल के निविदा में दिलचस्पी दिखाई थी।

बिजली मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को अपनी कोयले की आवश्यकता का 10 प्रतिशत मिश्रण के लिए आयात करने को कहा है और जेनकोस (विद्युत पैदा करने वाली कंपनियों) की ओर से कोल इंडिया को काम सौंपा गया है।