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5जी रोलाउट का भारत में इंटरनेट गति पर कैसा होगा प्रभाव, विलंब किसके पक्ष में जाएगा

रिलायंस जियो और भारती एयरटेल ने भारत में अपने 5जी नेटवर्कों का परीक्षण कर लिया है तथा अब देश सबसे तेज़ मोबाइल नेटवर्क के लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है। एक नेटवर्क विश्लेषक कंपनी ऊकला का कहना है कि 5जी के लॉन्च से देश में मीडिया डाउनलोड की गति संप्रति 4जी-एलटीई की तुलना में 10 गुना हो जाएगी।

अन्य एशियाई बाज़ारों के स्पीडटेस्ट डाटा के विश्लेषण से यह बात पता चली है। इसमें थाईलैंड और फिलीपीन्स जैसे देश भी हैं जिन्होंने हाल ही में 5जी लॉन्च किया है- क्रमशः 2020 की पहली और दूसरी तिमाही में।

सर्वेक्षण में पाया गया कि जून 2021 तक भारत के 64.5 प्रतिशत 4जी उपभोक्ताओं को 5 एमबीपीएस की गति मिलती है जो उन्हें एचडी वीडियो सामग्री की अबाधित स्ट्रीमिंग करने देती है। मार्च में यह आँकड़ा 52 प्रतिशत का था और यह एक सकारात्मक वृद्धि है।

हालाँकि, ऊकला का कहना है कि स्पेक्ट्रम आवंटन व रोलाउट योजनाओं पर अनिश्चितताओं के बीच यह कहना असंभव है कि सामान्य भारतीय उपभोक्ता के लिए 5जी कितना तेज़ होगा। इसमें रेडियो पहुँच नेटवर्क व बैकहॉल एवं परिवहन नेटवर्क वृद्धि भी सम्मिलित है।

लेकिन यह भी माना जा रहा है कि 5जी से देश में कुल मिलाकर डाटा गति बढ़ेगी। ऊकला डाटा के अनुसार मार्च 2021 से जियो का प्रदर्शन बेहतर हुआ है जहाँ मीडियन डाउनलोड गति 5.96 मेगाबिट प्रति सेकंड से जून 2021 तक 13.08 मेगाबिट प्रति सेकंड हो गई है।

इसके अलावा, अपलोड गति व “कन्सिस्टेन्सी अंक”, यानी कितने प्रतिशत नमूनों में डाउनलोड गति 5 एमबीपीएस से अधिक व 1 एमबीपीएस से है, में भी वृद्धि हुई है। नेट प्रमोटर स्कोर (एनपीएस) भी मार्च के -46.37 से बढ़कर जून में -25.93 हो गया।

हालाँकि, रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि सुनील मित्तल की कंपनी भी भारत में अपनी 5जी रोलाउट योजना के एक भाग में टाटा की ओपनरैन तकनीक को भी पायलट और तैनात करने की योजनाओं की घोषणा कर चुकी है।

भारत में 5जी रोलाउट

भारत में 5जी कब शुरू होगा इसपर कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों ने दावा किया था कि स्पेक्ट्रम नीलामी 2022 की शुरुआत में ही हो पाएगी जिसका अर्थ हुआ कि 5जी सेवाएँ 2022 के उत्तरार्ध या 2023 के आरंभ में ही शुरू हो पाएँगी।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया, “अगले वर्ष अगस्त तक 5जी नेटवर्क शुरू होगा और प्रधानमंक्षी 15 अगस्त को इसे आधिकारिक रूप से लॉन्च कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इसकी विशेषता यह होगी कि हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर में काफी भारतीय तकनीक देखने को मिलेगी।

“जैसा कि आप जानते हैं कि सॉफ्टवयर में भारत काफी मज़बूत है और इसलिए कई तकनीकें हमारी स्थानीय सॉफ्टवेयर तकनीकों पर निर्भर होंगी”, जो 5जी की रीढ़ की हड्डी बनेंगे, अधिकारी ने कहा। उनका दावा है कि एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग और क्वालकॉम भारत में हार्वेयर विनिर्माण शुरू कर चुके हैं।

अपेक्षा है कि भारत में 5जी को सफल बनाने के लिए कई और वैश्विक निगम भी आगे आएँगे। ज़ेटीई और हुआवे जैसे चीनी उपकरण निर्माताओं की बजाय विश्व के लिए 5जी तकनीक विकसित करने वाली अन्य कंपनियों को सम्मिलित किया जा रहा है और कई स्थानीय विनिर्माता भी सहयोग करेंगे, अधिकारी ने बताया।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (मेईती) के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने कहा, “भारत में 5जी के आकार लेने के साथ हम चाहेंगे कि विनिर्माण भारत में ही हो, न सिर्फ भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बल्कि वैश्विक स्तर के विनिर्माता और सेवा प्रदाता भी यहाँ से अपनी छाप छोड़ें।”

सचिव अजय प्रकाश साहनी

हालाँकि, गति के मामले में भारत अभी उनसे पीछे है जिन्होंने 5जी की तैनातियाँ शुरू कर दी हैं, जैसे यूनाइटेड किंगडम व यूनाइटेड स्टेट्स। लेकिन ऊकला का कहना है कि पर्दे के पीछे सभी संचालक 5जी को व्यवसायिक बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं।

कंपनी ने बताया कि 5जी ट्रायल में प्रभावशाली गतियाँ देखने को मिली है। आगे कहा गया कि 5जी रोलाउट में देरी का लाभ संचालकों को मिलेगा क्योंकि वे कम मूल्य पर नेटवर्क उपकरण खरीद सकेंगे।

“भारतीय संचालकों द्वारा ओपनरैन प्रणाली की स्वीकार्यता 5जी रोलाउट की कुल लागत को और कम कर देगी।”, ऊकला ने बताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 5जी स्मार्टफोनके मूल्य तो गिरने भी शुरू हो गए हैं जिसमें जियो मंचों व गूगल की साझेदारी ने भी भूमिका निभाई है।

ऊकला ने बताया कि वह देश में 5जी उपयुक्त उपकरणों पर अधिक से अधिक स्पीडटेस्ट परिणाम देख रही है जो “दर्शाते हैं कि एक पूर्व स्थापित उपभोक्ता आधार होगा जिसे संचालक लॉन्च के पहले दिन से ही लक्ष्य कर सकते हैं।”

अंतर्राष्ट्रीय डाटा निगम (आईडीसी) के अनुसार 50 लाख इकाइयों के 5जी शिपमेंट में भारत चीन, यूनाइटेड स्टेट्स और जापान के बाद चौथे स्थान पर रहा था और 410 डॉलर का न्यूनतम औसत बिक्री मूल्य था।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार विश्लेषकों का यह भी मानना है कि 2021 के अंत तक हैन्डसेट निर्माता 3.2-4 करोड़ 5जी हैन्डसेट भेज चुके होंगे जिसमें 200 डॉलर से कम के सस्ते 5जी उपकरण भी होंगे।